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अनिल पुरोहित - हिन्दी राइटर्स गिल्ड
Friday, May 3, 2013
दूब की पत्ती
पत्ती
-
एक
दूब
की
रात
भर
बोझल
,
बूंद
एक
-
ओस
से
।
तरसती
रही
-
सूरज
की
,
हल्की
एक
किरण
।
रात
ढल
-
छ्लका
सवेरा
हल्का
बोझ
,
दूब
का
हुआ
।
चढ़ा
दिन
-
हुई
दुपहरी
अब
झुलस
रही
-
पत्ती
वही
दूब
की
।
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